rishte..
रिश्ते सिर्फ़ इंसानो से ही नहीं.. रास्तो और शहरो से भी होते है.. राहो पे ठोकर देने वाले उन पत्थरो से भी होते है.. हस्सी और गम के उन लम्हो.. और उन लम्हो को पनाह देनी वाली उन दीवारो से भी होते है.. पड़ोस के किराने वाले राहुल से.. हर रोज़ रोटी बनाने वाली आंटी से भी होते है.. और छोटी छोटी खुशियो में शामिल करने वाले उन अंज़नो से भी होते है..
रिश्तो का कोई नाम नहीं होता.. रिश्ते बेनाम और बेआकर होते है.. परिभाषाओ के मायाजाल से परे.. ज़िन्दगी का सार होते है रिश्ते..